बच्चों की सुरक्षा के लिए लोकेशन ट्रैकिंग, लेकिन निजता पर बढ़ी चिंता
नई दिल्ली। बच्चों की सुरक्षा के लिए जीपीएस फोन, स्मार्टवॉच और लोकेशन-शेयरिंग ऐप्स का इस्तेमाल बढ़ रहा है। इससे माता-पिता बच्चों की लोकेशन जान सकते हैं और आपात स्थिति में मदद कर सकते हैं। हालांकि, लगातार निगरानी से बच्चों की निजता और स्वतंत्रता प्रभावित होने का खतरा भी है। लोकेशन डेटा गलत हाथों में पहुंचने से सुरक्षा संबंधी जोखिम पैदा हो सकते हैं। विशेषज्ञों का सुझाव है कि माता-पिता बच्चों को ट्रैकिंग का उद्देश्य समझाएं, उनकी उम्र के अनुसार निगरानी रखें और प्राइवेसी नीतियों की जांच करें। सुरक्षा के साथ बच्चों का भरोसा बनाए रखना भी जरूरी है।