वंदे मातरम के सम्मान और कानूनी दायरे पर अदालत का रुख
सुप्रीम कोर्ट ने यह जांचने पर सहमति व्यक्त की है कि राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ न गाने या इसमें बाधा डालने को दंडनीय अपराध बनाए जाने से जुड़े कानून की क्या स्थिति है। चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि केवल धार्मिक विश्वासों के कारण राष्ट्रगीत न गाने वाले व्यक्ति पर आपराधिक कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। अदालत ने 1986 के प्रसिद्ध बिजो इमैनुएल मामले का संदर्भ दिया, जिसमें सम्मानपूर्वक खड़े रहने को पर्याप्त माना गया था। सरकार ने राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम के तहत वंदे मातरम के सार्वजनिक अपमान या बाधा डालने पर सजा का प्रावधान किया है।